जब जब तेरी याद आती है
जब जब तेरी बात होती है
आज भी लगता है तेरे इंतजार मे
धडकने राग कोई गुनगुनाती है....
तनहा तनहा इस जिंदगी मे सदा
मुस्कुराहटे तेरी मैफिले सजाती है
हसती है जिंदगी भरी भरी आंखोसे
दुसरे पल मे हि तु रुला जाती है...
दिल है मेरा समंदर से भी प्यासा
सबकुछ होके भी एक प्यास रह जाती है
ऐसे मे तेरी यादोंकी लहरे गाते गाते
साहिल को छुके फिर तनहा कर देती है....
तेरे साथ जिदगी कि हर खुशी पायी थी
अब वोही खुशिया दर्द बन जाती है
दर्द को संभालु की दिल को मेरे यार
धडकने भी कभी कभी बेइमान हो जाती है.....
-- सतिश चौधरी
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