Thursday, February 25, 2010

मेरी तनहाईया...

तेरी रुसवाईया ... तेरी बेवफाईया
तिनका तिनका जलाती है दिलको
मेरी तनहाईया...मेरी तनहाईया...

मालुम नही इतना क्यु
प्यार तुमसे करता हु मै
जलता हु तेरी दिल्लगी मे
आशिकीमे पलपल मरता हु मै
एकबार तो समझले चाहत को मेरे
समंदर से भी गहरी है मेरे
दिलकी गहराईया....

तुफां कितने भी आये
पर मै ना ऐसे हटुंगा
इंतजार हो जितना चाहे
हरपल तेरी राह देखुंगा
अगर जिंदगी ये कम पड जाए
तो लुटा दुंगा तुझपे अगली
सारी जिंदगानिया...

-- सतिश चौधरी

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