Wednesday, November 25, 2009

साली छत्तीस नखरेवाली

साली छत्तीस नखरेवाली घायल करुन गेली
अंग अंग है पटाका जैसा साली आग लाऊन गेली

ये पोट्टी है आयटम बॉम्ब
इसके जलवे बिजली जैसे
करे हमे नाकाम...
आंख मारे... शिटी बजाए
सारी दुनिया पागल झाली..

शराब इसके होठो पे है
कबाब है इसका बदन
घुस्सा भी है इसका
चकने जैसा खट्टा तिखा
सौ बोतल नशा है इसकी गाली...

गीतकार - सतिश चौधरी

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