साली छत्तीस नखरेवाली घायल करुन गेली
अंग अंग है पटाका जैसा साली आग लाऊन गेली
ये पोट्टी है आयटम बॉम्ब
इसके जलवे बिजली जैसे
करे हमे नाकाम...
आंख मारे... शिटी बजाए
सारी दुनिया पागल झाली..
शराब इसके होठो पे है
कबाब है इसका बदन
घुस्सा भी है इसका
चकने जैसा खट्टा तिखा
सौ बोतल नशा है इसकी गाली...
गीतकार - सतिश चौधरी
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