Wednesday, November 25, 2009

हे ... पना रे पना...

हे ... पना रे पना...
न जीना तेरे बिना...

तेरी फुलोसी हसी
दिलमे यु बसने लगी है
मेरे दिलकी कलिया
खिलके यु हसने लगी है
तेरी हसी मेरी खुशी
ये ही मेरी पहली
आखरी तमन्ना...

मासुम आखे तुम्हारी
मुझसे क्या पुछने लगी है
ये भी ना जाने इनमे
चाहत बरसने लगी है
मेरी चाहत तेरी अमानत
इसको संभालना
तुम जानेजाना...


कवि- सतिश चौधरी

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