दुनिया को भुलने लगे है हम उनकी चाहत मे
अब तो खुद को भी पहचानते नही....
दिल मे समंदर है प्यार का उनके लिये
न जाने इस बात को क्यो हम मानते नही...
दिलतो है हमारा मगर धडकता है उनके लिये
दिलमे दर्द है कितने फिरभी दुवा मांगता है उनके लिये
दिलके इस गुस्ताखी को कौनसी सजा दे हम जानते नही....
दिलमे समंदर है प्यार का उनके लिये...
न जाने इस बात को क्यो हम मानते नही...
सोचते है नजरे चुराये ऊनसे हम बेगानोकी तरहा...
पर उनकी नजर फिर भी, लौट आये अपनो कि तरहा
अब तो अपनी ही नजरो मे हो गये है बेगाने हम
उनकी नजरो से नजर चुराना भी हम जानते नही
दिलमे समंदर है प्यार का उनके लिये...
न जाने इस बात को क्यो हम मानते नही...
बेचैन आखे हमारी सोयी नही है कितने दिनोसे
नशा कोइ इनमे आ रहा है बस उनके ही सपनोंसे
ये सपने कही टुट न जाये अब दिल भी चुपकेसे रोने लगा है
छुपाये हम दिलके अरमा पर आंसुओ को छुपाना जानते नही....
दिलमे समंदर है प्यार का उनके लिये...
न जाने इस बात को क्यो हम मानते नही...
-- सतिश चौधरी
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